सबका सुमित
Saturday, April 25, 2026
मुक्तक
मैं रोजाना अपने हाथ मलता हूँ,
जो जैसा चलाये, वैसा चलता हूँ।
कुछ हैं जो अब भी जान लुटाते हैं,
किसी-किसी को बहुत खलता हूँ।।
चुटकी
करके 'आप' में बड़ा खड्डा,
साथियों संग निकले चड्ढा।
झटका देकर केजरीवाल को,
भाजपा को बना लिया अड्डा।।
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Comments (Atom)