Saturday, August 15, 2026

कॉकरोच और कूड़ेदान

भारत में बहुत आजादी है। रहने की, खाने की, बोलने की, घूमने की...और तो और पार्टी बनाने की। भारत के मुख्य न्यायाधीश साहब ने एक टिप्पणी क्या कर दी अमेरिका में बैठे लड़के ने राजनीतिक पार्टी ही बना ली। कॉकरोच जनता पार्टी। मुझे लगता है उसने ज्यादा ही सीरियली ले लिया। सुना है दिल्ली में सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन भी किया है। ये भी सुनने में आया है कि जैसे ही पुलिस जब 'हिट' बनकर सामने आई, उस जैसे कई कॉकरोच किसी न किसी कोने में जाकर छिप गए। लेकिन कुछ भोले-भाले कॉकरोच तो पिट गए। 

एक बात कहूंगा कि भाई हम भारतीय हैं। हमें क्यों बेवकूफ बना रहे हो। एक आदमी पहले ही झाड़ू लेकर जनता को मूर्ख बनाता घूम रहा है। हम जानते हैं कि तुम्हारे पीछे कई बड़े कॉकरोच हैं। इन कॉकरोच की संख्या बढ़ती जा रही है। ये देश के अलग-अलग राज्यों फैले हुए हैं। चुनाव आते ही अपना गठबंधन बना लेते हैं। ये कॉकरोच बहुत मौका परस्त दिखाई देते हैं। कभी साथ रहते तो कभी अलग-अलग। यूपी, हैदराबाद और दिल्ली का टोपी वाला...एक टीशर्ट वाला... जब लगता खतरा है तो एक हो जाते हैं...। बंगाल की एक मादा कॉकरोच ने तो बिल्कुल नाक में दम कर दिया था... वो तो दूसरे देश से भी कॉकरोच लाकर यहां पाल रही थी। कुछ कॉकरोच तो इतने बहरूपिये होते हैं कि कभी किसान बन जाते हैं, कभी पर्यावरणविद, कभी पत्रकार तो कभी राजनेता। अलग-अलग भेष में दूसरों के लिए पिच तैयार करते हैं। आजकल तो देख रहा हूँ मनोरंजन जगत में भी कई कॉकरोच घुस गए हैं। 

खैर छोड़ो.... जज साहब ने कॉकरोच कह दिया तो तुम इतना क्यों बुरा मान गए भाई...? ऐसे हर कोई बुरा मानने लग जाएगा तो रोज नई पार्टियां खड़ी हो जाएंगी। किसी को मच्छर कह दिया तो वो 'मच्छर मोर्चा' बना लेगा। गधा कहने पर 'गधा गठबंधन' और उल्लू कहते ही 'उल्लू विचार मंच' बना सकता है। 

गधा, उल्लू जैसे विश्लेषण तो हमें हमारे पिताजी, दोस्तों, रिश्तेदारों और अधिकारी से कई बार मिलते रहे हैं। लेकिन मजाल है कि हमने कभी गंभीरता दिखाई हो। मेरे मन में भी कई बार आया कि ऐसे उटपटांग संगठन बनाऊं लेकिन मैंने कभी सीरियसली नहीं लिया। 

मैं तो कहता हूँ वापस अमेरिका लौट जाओ। 

क्योंकि ये सरकार बड़ी हिट है... इसने तुम जैसे सैकड़ों कॉकरोच को देश से बाहर फेंक दिया है। जाकिर नाइक, ध्रुव राठी, गुरपतवंत सिंह पन्नू को तो जानते ही होंगे। कुछ कॉकरोच भारत में रहकर कभी-कभी बिल से बाहर निकलते हैं, उनका भी इलाज कर दिया जाता है। यासीन मलिक, शरजिल इमाम, उमर खलीद, ताहिर हुसैन जैसों से भी आपका परिचय होगा ही। 

इसलिए भाई, पार्टी बनाओ, पोस्टर छपवाओ, प्रेस कॉन्फ्रेंस करो... लेकिन याद रखना, लोकतंत्र में आखिरी फैसला न कॉकरोच करते हैं, न मच्छर, न उल्लू और न ही गधे। आखिरी फैसला हमेशा जनता करती है। बस एक सलाह है कि प्रोटेस्ट करो, प्रोपेगेंडा मत फैलाओ...। नीट की बात करो लेकिन चीट मत करो...। हम अन्ना हजारे की आड़ में हुए एक प्रयोग से धोखा खा चुके हैं।

और आखिरी बात...लोकतंत्र में पार्टी बनाने की आजादी है, लेकिन जनता को यह भी आजादी है कि चुनाव आते ही ऐसे प्रयोगों को सीधे कूड़ेदान में डाल दे। 

- जय हिन्द।

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