Saturday, August 15, 2026

सुन बे! जंतर-मंतर के जेन ज़ी

जंतर-मंतर से 'जीत' का गुब्बारा फुलाए जेन ज़ी का एक नमूना मुझसे मिला। बोला- अंकल! हमने आज एक बहुत बड़ी जंग जीत ली है। 

उसकी नजर में मैं अंकल ही था, भले ही मैं खुद को आमिर खान समझूँ। 

खैर, 

मैंने पूछा- कैसी जंग? वो बोला- "वी टुक द रेजिग्नेशन ऑफ ए मोदी गवर्नमेंट'स मिनिस्टर...।" 

मैंने लंबी सांस खींचते हुए कहा ओह...कांग्रेचुलेशन। 

मुझे अंग्रेजी इतनी ही आती है। चूंकि अंग्रेजी पीता नहीं हूँ इसलिए बोल भी नहीं पाता।

उसके जाने के बाद मेरे दिमाग में एक जंग शुरू हो गई। मेरे मन में आया कि हमने जिस तरह का फूहड़ प्रदर्शन जंतर-मंतर पर देखा है, अगर जेन ज़ी इसे जंग कहेंगे तो फिर वो क्या है जो हमारे सेना के जवान सरहद करते हैं। यदि यही जेन ज़ी आगे चलकर सेना में भर्ती हो गया तो फिर क्या होगा? इन्हें मोबाइल से मीम, रील बनाने से फुर्सत नहीं है। कंटेंट क्रिएटर के नाम पर क्या नहीं करते। यदि यही मोबाइल पर अंगुलियां घिसने वाला जेन ज़ी सेना में भर्ती हो गया तो जंग कैसे लड़ेगा? रातभर मस्ती में मीम और रील बनेंगे, दूसरी ओर दुश्मन हमारी रेल बना देंगे।

   आज का जेन ज़ी न टाइम पर उठता है, न खाता है, न नहाता है, बस स्क्रीन से चिपका रहता है। मसखरी करने वाली ये पीढ़ी अगर भविष्य की फौज बनी, तो ट्रेनिंग भी क्या यूट्यूब, गूगल जिमेनाई, चैट जीपीटी या एलेक्सा से लेगी?

मैं इतना सोच ही रहा था तभी वह फिर लौटकर आया। मैंने उसे पास बैठाया और कहा- सुन बे! जंग वो नहीं होती जो तुम जंतर- मंतर पर जीतकर आये हो। असली जंग तो सरहद पर होती है। जिस मोदी सरकार को तुम झुकाने की बात कर रहे हो, उसने देश कभी झुकने नहीं दिया....उसने तो न जाने कितनी बार इस देश का मस्तक ऊंचा किया है। जंग वो होती है जब कोई पुलवामा और उरी जैसी हरकत करता है तो सर्जिकल और एयर स्ट्राइक कर हम घर में घुसकर मारते हैं। कोई पहलगाम करता है तो ऑपरेशन सिंदूर होता है। जंग तो जवान लड़ते हैं। मोदी सरकार आने से पहले क्या जेन ज़ी ने हिम्मत की कि कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहरा पाए... क्या किसी जेन ज़ी ने हिम्मत की कि वो भारत माता को धारा 370 की बेड़ियों से मुक्त करने के लिए आंदोलन करे। यही जेन ज़ी जब रूस और युक्रेन के युद्ध में फंसता है सबसे पहले मोदी को ही याद करता है..दूसरे मुल्कों के जेन ज़ी भी तिरंगा पकड़कर सुरक्षित लौट आते हैं। युद्ध, गृहयुद्ध, राजनीतिक संकट, महामारी और प्राकृतिक आपदा जैसी हर परिस्थितियों में कई बार विदेशों में फँसे भारतीय नागरिकों को निकाला है। इसलिए मुझे तो लगता है कि तुम जिस जंतर-मंतर की जीत का जश्न मना रहे हो वो तुम्हारी बड़ी हार है। जीता तो कोई और है... शायद इस्तीफे से इस देश पर मंडरा रहे बहुत बड़े संकट पर जीत हुई है। इसका पता तुम्हें समय आने पर चलेगा....

तभी जेन ज़ी बोला- अच्छा अंकल मैं चलता हूँ...

मैंने सोचा - अरे यार ये फिर अंकल कह गया....

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