Monday, January 24, 2022

चुटकी

रोएगा मौर्य, अखिलेश पछतायेगा,
पप्पू भी बेचारा मुँह की ही खायेगा,
योगी जी आप देखो चिंता न करो,
बहू आ गई है, बहुमत भी आएगा।

Thursday, January 13, 2022

चुटकी

किसी भी हद तक बढ़ सकती हूँ,
भैया के पीछे भी पड़ सकती हूँ,
छटपटा रही दीदी सत्ता के लिए,
बोली- लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ।।

Thursday, December 30, 2021

चुटकी

बड़ा खराब जमाना हुआ,
जब चुनाव का आना हुआ,
दीदी पर छोड़ जिम्मेदारी,
पप्पू इटली रवाना हुआ।

Tuesday, June 22, 2021

चुटकी

 पंक्चर हो गई देखो दंगाइयों की गाड़ी, 
खुल गई पोल और हांफने लगी नाड़ी, 
योगी जी को फंसाने वाले खुद ही फंसे,
बड़े दिखा रहे थे अपनी कटी हुई दाढ़ी।

चुटकी

 मची हलचल राजनीति के बाड़े में
,चिराग और चाचा उतरे अखाड़े में,
रामविलास जी दो बुद्धि अपनों को, 
बेच बैठे इज्जत दोनों ही कबाड़े में।

Tuesday, June 15, 2021

चुटकी

 बड़े-बड़े षड्यंत्र करते वो झूठे,
रामकाज रोकने फिर गिद्द टूटे।
अब तो चुप हो जाओ 'आप',
इससे पहले कि पड़ जाएं जूते।

Saturday, June 12, 2021

चुटकी

विवादित बयानों के सरताज हो,
राजनीति के बहुत बेसुरे साज हो,
धारा 370 हटने पर इतने दुःखी!
सच में तुम बहुत बड़ी खाज हो।

Thursday, April 23, 2020

चुटकी

उससे जब इश्क किया था मैंने,
जिंदगीभर का रिस्क लिया था मैंने,
शादी न हो तो न कहलवाना मामू हमें,
ये भी उसी दिन फिस्क किया था मैंने।
                             

कोरोना के दोहे


                        (1)
कोरोना कहे मोदी से तू क्यूं रौंदे मोये।
मौलाना कुछ मिल जाएं बस मैं रौंदूंगा तोये।।
                         (2)
जाती न पूछो 'वायरस' की, पूछ लीजिये प्रभाव।
किसी पर न करना भरोसा, अपने ही देंगे घाव।।
                         (3)
कोरोना-कोरोना सब करे, उपाय करे न कोये।
जो सब उपाय करे, तो कोरोना कायको होये।।
                         (4)
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे मौलाना हुजूर।
हरकत कर दी ऐसी, कोरोना फैला सब दूर।।
                         (5)
मौलाना खड़ा बाज़ार में, पूछे सबकी खैर।
कोरोना एक मिल गया, ले लिया सबसे बैर।।

कोरोना तेरी ऐसी-तैसी

हालत कर दी हमारी कैसी,
'कोरोना' तेरी ऐसी-तैसी।।

सूने पड़े हैं सभी टाउन,
सेंसेक्स की हालत भी है डाउन,
मिलों, कारखानों में ताले हैं,
मजदूरों के खाने के लाले हैं,
अर्थव्यवस्था बहुत मंद है,
मिलना-जुलना तक बंद है,
हालत कभी नहीं देखी ऐसी,
'कोरोना' तेरी ऐसी-तैसी।।

घरों में हो गए हैं सभी कैद,
बाहर खड़ी पुलिस मुस्तैद,
घूमने के अरमान हो रहे ठंडे,
घर से निकलो तो पड़ते डंडे,
सबका सुख-चैन रहा है छिन,
सोच रहे हैं कैसे कटेंगे दिन,
स्थिति हो रही पागलों जैसी,
'कोरोना' तेरी ऐसी-तैसी।।

तुम घटिया वायरस निकले चीन से,
इलाज नहीं तुम्हारा कोई वैक्सीन से,
पूरी दुनिया को हिला दिया है,
हजारों को मौत के मुंह में सुला दिया है,
कोई लगा रहा अस्पतालों के चक्कर,
कोई उपाय कर रहा है देसी,
'कोरोना' तेरी ऐसी-तैसी।।

हालत कर दी हमारी कैसी,
'कोरोना' तेरी ऐसी-तैसी।।
                  - सुमित राठौर