Thursday, November 29, 2012

स्मारक तो जरूर बनेगा



          जहां नेता वहां समस्या और जहां समस्या वहां नेता। नेता नहीं तो स्मारक और जहां स्मारक वहां फिर समस्या। कुल मिलाकर हम चारों ओर से समस्याओं से घिरे हुए हैं। नेताजी तो चल बसे हैं लेकिन कार्यकर्ताओं के लिए अभी भी जिंदा हैं। इसलिए नेताजी का स्मारक बनाने पर बहस छिड़ी हुई है। लेकिन स्मारक कैसे, कहां और कितना भव्य बनाया जाए इसके लिए पूरा देश चिंता कर रहा है। इसी चिंता में हमारे रामदीन जी भी डूबे हैं। बेचारे रामदीन जी ने चिंता में अपनी तबियत ही बिगाड़ ली। अस्पताल में भर्ती हो गए। मैं मिलने गया तो वहां भी स्मारक की चिंता। मैंने उनसे मना किया तो मुझसे ही उलझ गए।
          मैंने उनसे कहा कि स्मारक बनाना क्या जरूरी है? नेताजी के विचार तो हमारे दिलों में, रगों में दौड़ रहे हैं। इस बात पर रामदीन जी इतना गुस्सा हो जाएंगे मुझे भी नहीं पता था। गुस्से में बोले-'यह तो हम भी जानते हैं कि नेताजी हमारे दिल, दिमाग में जिंदा हैं, उनके विचार हमारी रगों में दौड़ रहे हैं लेकिन अपनी भावनाओं को प्रकट करने के लिए स्मारक तो बनाना ही पड़ेगा।' उन्होंने सवाल करते हुए कहा-'आपको हमारे नेताजी के स्मारक बनने पर इतनी आपत्ति क्यों है?' आपकी बहनजी ने लखनऊ में देखिए न कितना बड़ा अम्बेडकर पार्क बनाया है। पूरे 6000 करोड़ में जगह-जगह हाथी और अपने पुतले खड़े कर दिए तब कोई क्यों नहीं बोला। हालत कमजोर थी लेकिन फिर भी चेतावनी देते हुए बोले-'यदि हमारे नेताजी का स्मारक नहीं बना तो हम देश, राज्य में और तो और अपने शहर में एक भी सड़क, पुल-पुलिया, अस्पताल व स्कूल भी नहीं बनने देंगे।' रामदीन जी ये शब्द सुनकर ऐसा लग रहा था मानो उनके शरीर में नेताजी के बेटे और भतीजे की आत्मा समा गई हो। रामदीन जी बोले-'यदि किसी ने हमारे नेताजी के स्मारक बनने में सहयोग नहीं दिया तो पूरे राज्य में उथल-पुथल मच जाएगी। हम हड़ताल कर देंगे। कोई यातायात, कोई दुकान, कोई स्कूल नहीं खुलने देंगे।' जगह की थोड़ी दिक्कत हो रही है जैसे ही फाइनल होगी हम स्मारक बनवाएंगे।
       अब रामदीन नहीं उनके भीतर की आत्मा बोल रही थी। कहने लगे हमारे नेताजी हमारी प्रेरणा थे, हमारी शक्ति थे। इसलिए स्मारक तो बनाकर ही छोड़ेंगे। भैय्या, आत्मा तो आखिर आत्मा होती है। वह कहां चुप रहने वाले थे। थोड़ी देर बाद फिर बोले- 'वह तो हम थोड़े लेट हो गए वरना बहनजी की तरह पहले ही पार्क में जगह घेर लेते तो अच्छा होता। नेताजी के रहते ही जगह फाइनल कर लेते, स्मारक कितने का बनना है यह भी तय कर लेते तो सब ठीक हो जाता। नेताजी की मर्जी से काम हो जाता तो किसी तरह की कोई दिक्कत भी न होती। खैर...। हमें किसकी सुननी है। हमें तो स्मारक बनाना है और वह तो हम बनाकर ही दम लेंगे। जय हिंद...।

Wednesday, November 21, 2012

शोध हो तो ऐसे...

 
      वैज्ञानिक झूठे होते हैं। यह मैंने कई बार शोध करके देख लिया है। चाहे वह लंदन के हों या फिर भारत के। अभी लंदन के वैज्ञानिकों ने यह शोध कर पता लगाया है कि 'प्यार में व्यक्ति की बुद्धि मर जाती है।' उन्होंने कई प्रेमी व्यक्तियों पर शोध कर इस बात को साबित किया। जहां तक मुझे शंका हो रही है, वह यह कि लंदन के वैज्ञानिक कोई प्रेमी व्यक्तियों से नहीं मिले होंगे। बल्कि उनकी मुलाकात निश्चित रूप से हमारे नेताओं से हुई होगी। नेताओं पर अपना शोध करने के बाद उन्होंने इसे हीर रांझा, लैला मजनू व सलीम अनारकली वाला प्रेम कह दिया।
      वैज्ञानिकों ने अपने शोध में जितनी भी बातें बताई हैं वह सारी बातें हमारे नेताओं के व्यवहार से बिल्कुल मिलती-जुलती हैं। मैं वैज्ञानिकों की एक-एक बात को नेताओं से जोड़कर यह साबित कर सकता हूं कि वे किसी भी प्रेमी से नहीं मिले होंगे। अपने शोध में वैज्ञानिकों ने बताया है कि प्यार करने वाले व्यक्ति के दिमाग में 'द अमाइग्डाला' नामक हिस्सा काम करना बंद कर देता है। यह वह हिस्सा होता है जिसमें व्यक्ति को डर नहीं लगता है। यह तो हमारे नेताओं के साथ भी होता है। सत्ता में आते ही हमारे नेताओं में भी 'द अमाइग्डाला' नामक हिस्सा काम करना बंद कर देता है। अभी पिछले दिनों ही एक नेता ने सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपने शहर आने पर 'देख लेने की धमकी दी थी।'
      वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि प्यार करने वाले व्यक्ति में 'फ्रंटल लोब' हिस्सा भी काम करना बंद कर देता है। यह वह हिस्सा होता है जिसमें निर्णय लेने की क्षमता बंद हो जाती है। यह गुण भी हमारे नेताओं में होता है। पूरा देश जानता है कि हमारे प्रधानमंत्री भी इसी बीमार के शिकार हैं। कोई निर्णय ही नहीं ले पाते हैं। जो निर्णय मैडम ने लिया, बस वही अंतिम समझो।
      वैज्ञानिक कहते हैं कि प्यार करने वाले व्यक्ति का 'पोस्टेरियर सिंग्यूलेट' यानि की सहानुभूति नियंत्रक हिस्सा भी काम करना बंद कर देता है। यह भी हमारे नेताओं के साथ होता है। सत्ता में आते ही सहानुभूति तो खत्म हो ही जाती है। अपनी नीतियों के कारण गरीब को जितना कष्ट दिया जा सकता है उतना देने की कोशिश की जाती है। शोध में बताया गया कि प्यार करने वाले व्यक्ति में 'मिड टेम्पोरेल कोर्टेक्स' हिस्सा भी काम करना बंद कर देता है। इस हिस्से के काम बंद करने के कारण व्यक्ति महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने में अक्षम हो जाता है। यह बात भी हमारे सामने कई बार सामने आती है।
       कुल मिलाकर वैज्ञानिक थोड़ा सच बोल देते तो इनका क्या जाता। व्यक्ति को कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए। और यह तो फिर भी वैज्ञानिक थे। हमारे नेताओं पर किए गए शोध का हम बुरा थोड़ा ही मानते। प्रेम तो आखिर प्रेम होता है। फिर वह चाहे कुर्सी से ही क्यों न हो। कुर्सी प्रेम के कारण नेताओं की दिमागी स्थिति पर खूब शोध किया वैज्ञानिकों ने। इसके लिए तो वे बधाई के पात्र हैं।

Friday, November 16, 2012

चोरी सिलेण्डर की


     चालीस वर्ष की आयु में पहली बार आज जब रामदीन जी थाने पहुंचे तो बेचारे काफी परेशान हो गए। मामला भी काफी गंभीर था। उनका सिलेण्डर चोरी हो गया था। चूंकि एक से भले दो होते हैं इसलिए मैं भी उनके साथ गया था।
    हमारी हवा तो उसी वक्त निकल गई थी जब दो सिपाहियों ने सवाल किया कि 'यहां क्यों आए हो?'
हालांकि सवाल छोटा था लेकिन बड़ा खतरनाक था।
    रामदीन-'हमें चोरी की रिपोर्ट लिखवानी है, कहां जाना पड़ेगा? ' उन सिपाहियों ने हमें इशारे से बताते हुए उचित स्थान पर भेज दिया। इसके बाद फिर शुरू हुआ सवाल जवाबों का सिलसिला।
पहला सवाल थानेदार की ओर से कड़क आवाज में आया।
'क्या हो गया?'
    रामदीन- 'चोरी हो गई'। अगला सवाल।
'कैसे हो गई'।
      रामदीन-'साहब! आप तो जानते हैं आज दीपावली का त्यौहार है। सो पूरा परिवार घर के बाहर फाटाखे जला रहा था। हम भूल गए कि घर का दरवाजा खुला हुआ है। इतने में पता नहीं कौन मुआ चोर घर में घुस गया और चोरी हो गई।'
    अब महत्वपूर्ण सवाल आना प्रारंभ हुए।
 थानेदार-'अच्छा, ये बताओ क्या-क्या सामान चोरी गया है?'
 रामदीन- 'सर! हमारी एक ही चीज चोरी हुई है और वह है हमारा सिलेण्डर।'
अगला सवाल पहले वाले सवाल से भी ज्यादा महत्वपूर्ण था।
   थानेदार-'सिलेण्डर कितने नम्बर का था?'
     सवाल सुनते ही रामदीन जी की सिट्टी-बिट्टी गुम हो गई। लेकिन हमने जैसा कि पहले ही कहा था कि एक से भले दो होते हैं इसलिए मैंने रामदीन जी को संभालते हुए उनसे ही पूछा अरे! भाई सिलेण्डर कौन से नम्बर है मतलब यह कि छटवें से नीचे है या ऊपर। रामदीन जी तो पहली बार रिपोर्ट लिखवाने आए थे इसलिए उन्हें नहीं पता था कि चोरी की रिपोर्ट में हमेशा ज्यादा माल लिखवाया जाता है क्योंकि ज्यादा बड़ी चोरी में ही पुलिस ज्यादा सक्रिय दिखाई देती है। मैंने थानेदार को बताया कि साहब! चोरी गए सिलेण्डर के बारे में हमें ज्यादा जानकारी तो नहीं है लेकिन हां! इतना जरूर पता है कि चोरी गया सिलेण्डर छठवें से ऊपर का था। मतलब, सातवां या आठवां हो सकता है। मैंने रामदीन जी को धीरे से समझाया कि सरकार ने पहले छह सिलेण्डर पर सब्सिडी दी है जबकि सातवां सिलेण्डर 500 रुपए महंगा है। इसलिए सातवां ही लिखवाओ।
थानेदार-'तुम्हारे पास 'पासबुक' है', जिससे पता चल सके कि सिलेण्डर कौन से नम्बर का था। रामदीन जी ने सर हिलाकर मना किया तो उन्होंने हमें टरकाते हुए कहा-'जाइये'  हमारा टाईम खराब मत कीजिए। पहले घर से 'पासबुक' ले आओ फिर आपकी रिपोर्ट लिखेंगे। खुद तो दीपावली पर धूमधाम से फटाखे फोड़ रहे हो, हमारे बच्चों की ओर ध्यान कौन देगा।'
       मैं थानेदार का इशारा समझ गया। थानेदार हमसे रिश्वत मांग रहा था। मैंने जब उनकी बात रामदीन जी को बताई तो वह गुस्सा हो गए। गुस्से में बोले-'साहब! आपको रिपोर्ट लिखना हो तो लिखिए हम आपको रिश्वत नहीं दे सकते। 'मैं आम आदमी हूं।' भ्रष्टाचार के खिलाफ चलने वाले आंदोलन का एक सिपाही हूं।'
थानेदार चुटकी लेते हुए बोला-'मैं मानता हूं कि तुम आम आदमी हो, लेकिन आम आदमी की आजकल सुनता कौन है। अरविंद केजरीवाल खुद अण्णा हजारे की नहीं सुन रहे हैं तो तुम किस खेत की मूली हो। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते-लड़ते टीम अण्णा भी तो भारतीय क्रिकेट टीम की तरह गुटबाजी का शिकार हो गई है। इसलिए तुम्हें गुट में रहकर घुट-घुटकर जीना ही पसंद है तो इसमें हम कुछ नहीं कर सकते हैं। जहां तक सिलेण्डर की चोरी होने पर रिपोर्ट लिखवाने की बात है तो जब तक आप 'पासबुक' नहीं लाएंगे, हम आपकी रिपोर्ट नहीं लिख पाएंगे।'
       थानेदार-'आप शायद जानते नहीं कि इस यूपीए सरकार के कार्यकाल में जितनी तेजी से रसोई गैस केदाम बढ़े हैं, उतनी ही तेजी से सिलेण्डर चोरी के मामले बढ़ रहे हैं। हमारे पास रोज कोई न कोई व्यक्ति सिलेण्डर चोरी की रिपोर्ट लिखवाने चला आता है। हमने तो अलग से एक तीन सदस्यीय जांच समिति भी बना दी है। कल ही हमने दो लड़कों को सिलेण्डर चोरी की योजना बनाते हुए पकड़ा है।'
     हम बिना रिपोर्ट लिखाए लौट ही रहे थे कि थानेदार ने हमें तसल्ली भरे शब्दों में कहा-'देखो रामदीन, तुम शक्ल और अक्ल से भोले लगते हो इसलिए कह रहा हूं कि आजकल जब घोटाले पर घोटाले, दिन प्रतिदिन बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण लोगों का जीना मुहाल हो रहा है तब भी तुम्हारे घर का चूल्हा जल रहा है तो मुझे यह बात बड़ी लगती है। वैसे तो इस सरकार ने कई घरों के चूल्हे बुझा दिए हैं लेकिन मैं तुम्हे आश्वासन देता हूं कि तुम्हारे सिलेण्डर को ढूंढने का प्रयास करूंगा।'
      थानेदार की इस तसल्ली भरी बात पर हम लोग खाली हाथ घर लौट आए। फिर खुशी से फटाखे जलाने लगे।

Wednesday, November 7, 2012

आपका बहुत-बहुत शुक्रिया मच्छर जी...

           

           आदरणीय मच्छर जी...। वैसे तो आपको देखकर मन में सहज ही क्रोध का भाव आ जाता है लेकिन आज प्रेम उमड़ रहा है। हालांकि मुझे दु:ख इस बात का है कि मैं इस प्रेम को अभिव्यक्त कर तो रहा हूं लेकिन आपको कैसे ज्ञात होगा इसको लेकर चिंतित भी हूं। आपको बोलकर भी नहीं बता सकता, अनपढ़ तो आप हो ही। फिर भी इस प्रेम को लोगों तक पहुंचा रहा हूं। मुम्बई 26/11 के आतंकवादी अजमल आमिर कसाब को अपनी शक्ति से परास्त करने की कोशिश की उससे हम लोगों के मुंह पर ताले लग गए हैं और शिक्षितों को आपने मूर्ख साबित कर दिया है। आपने अपने डंक से डेंगू जैसी बीमारी देकर अपनी देशभक्ति साबित कर दी है। वरना हमारी देशभक्ति तो जैसे मर ही गई है। वोटों के लालच ने हमारे खून की रवानी को सुखा दिया है।
        सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतारने वाले आतंकवादी की हमारी सरकार दामाद की तरह खातिरदारी कर रही है, उससे कई बार मन विचलित हुआ लेकिन कुछ मजबूरियों के कारण हम कुछ नहीं कर सके। सुप्रीम कोर्ट ने भी फांसी की सजा सुनाई लेकिन राजनीतिक चालबाजों ने फंदे को इतना ढीला कर दिया कि वह हर बार बच निकलता है। कड़ी सुरक्षा, शानदार भोजन पानी जो हम भारतीयों को कभी भी प्राप्त नहीं हुई वह कसाब जैसे आतंकवादी को मिल रही है। जनता की कमाई को आतंकवादी पर लुटाया जा रहा है। यह स्थिति आप आज भी देख सकते हैं कि जिस देश में हजारों गरीब और उनके बच्चे डेंगू, मलेरिया, कुपोषण, उल्टी, दस्त से चल बसते हैं उस समय सरकार ध्यान नहीं देती लेकिन कसाब को डेंगू होते ही डॉक्टरों की टीम को चौसीब घंटे निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। कसाब का स्वास्थ्य और अधिक खराब न हो उससे चिंतित होकर हमारे नेताओं के स्वास्थ्य बिगड़ रहे हैं।
        मच्छर जी...। आपसे एक निवेदन और भी है। क्या आप अपनी अन्य प्रजातियों को इस देशभक्ति अभियान में शामिल कर सकते हैं। एक और आंतवादी मोहम्मद अफजल गुरू भी कई वर्षों से फांसी के फंदे तक नहीं पहुंच पा रहा है। कुछ लालची नेताओं ने इससे भी जिंदा रखा हुआ है। क्या आप डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, जैसी घातक बीमारियां देकर इससे भी अपना शिकार बना सकते है?
        हां! एक बात और। आपके इस अभियान को कुचलना प्रयास भी किया जाएगा। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार आज बाबा रामदेव, अण्णा हजारे, अरविंद केजरीवाल के अभियानों को लेकर हो रहा है। आपके इस अभियान को कुचलने के लिए हमारा स्वास्थ्य विभाग कुछ कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी करेगा। लेकिन हम जानते हैं कि आपकी प्रजाति में बलिदान देने की परंपरा सदैव रही है। कई बार हम एक झटके में आपके परिजनों को मौत के घाट उतार देते हैं। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आपका देशभक्ति पूर्ण अभियान रुकने वाला नहीं है। इस अभियान में भले ही कोई आपका साथ न दे लेकिन मेरा साथ हमेशा रहेगा। आपका शुभचिंतक।