हमारे देश का कानून भी अजीब है। एक ओर गरीब आदमी अपनी रिपोर्ट लिखवाने के लिए गिड़गिड़ाता है वहीं दूसरी ओर प्रिंटी जिंटा जिनके साथ 15 दिन पहले छेड़छाड़ हुई उसकी रिपोर्ट तुरंत लिख ली जाती है।
जनता यूं ही गलतफहमी में थी कि 'अच्छे दिन आने वाले' हैं। जबकि यह नारा तो उस पार्टी के नेताओं के लिए था जो पिछले दस वर्षों से विपक्ष में बैठे हुए थे और आज सत्ता संभाल रहे हैं।
महंगाई बहुत है। जाने क्या होगा? हमने तो अपना दिमाग लगाना ही बंद कर दिया
है बिल्कुल प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी की ही तरह!! जैसे देश चल रहा
है वैसे ही हम घर चला रहे हैं। मैडम जो कह दें, वही मान लेते हैं