Monday, October 7, 2013

सरकार



         चुनाव आ गए हैं। जिधर देखो उधर नेता अपना 'नेतापन' दिखा रहे हैं। जब कोई व्यक्ति बहुत-बहुत अच्छी बात करता है तो उसे अपनापन कहते हैं। बिल्कुल इसी तरह जब कोई नेता अच्छी बातें करता है तो वह 'नेतापन' कहलाता है। आइए आपको भी एक राजनीतिक सभा में ले चलते हैं। सभा चल रही है। नेता भाषण दे रहे हैं। आप जिस तरफ खड़े हैं, वहां पर लगा लाउडस्पीकर सीधे आपके कानों तक 'नेतापने' की बातें आप तक पहुंचा रहा है। जिंदाबाद, जिंदाबाद के नारे तो जैसे आफत लग रहे हैं। फिर भी क्या करें जब सभा में 'ट्रॉली' में भरकर लाए गए हैं तो सुनना भी मजबूरी है। 
          खैर अपने मुखरचंद जी की सभाओं में तो जमकर भीड़ जुटती है। आज भी ऐसा ही हुआ। भाषण देते हुए बोले- 'हम सत्ता में आ रहे हैं। पहले भी देश चलाया, आगे भी चलाएंगे।' बोले-'हमारे साथ रहोगे तो मजे करोगे मजे। हमने बहुत लोगों को मजे कराए हैं। कलमाड़ी को ही देख लो। आज करोड़ों में खेल रहा है। ए.राजा, कनिमोझी, नवीन जिंदल सभी ने सरकार में रहते खूब मजे किए। अब किस किस के नाम गिनाएं आपको। नाम गिनाएंगे तो सुबह हो जाएगी।'
        'हमारी पार्टी हमेशा से ही 'ए फ्रेंड इन नीड इज ए फ्रेंड इनडीड' पर विश्वास करती है। आप मुलायम सिंह को देख लो। परमाणु समझौते के वक्त उन्होंने हमारी सरकार बचाई, हमने उन्हें जांच एजेंसी से बचाया। 'माया' मैडम का भी कुछ ऐसा ही समझो। नहीं तो आज दोनों लालू यादव की तरह जेल में सजा काट रहे होते। भैया हमारी सरकार में तो हर कोई मजे करता है।' 
       'कुछ लोगों को हमारी ताकत का अंदाजा नहीं रहता। जिन्हें अंदाजा रहता है वह जानते हैं कि हम क्या-क्या करवा सकते हैं।' अण्णा हजारे और बाबा रामदेव यूं ही पंगा ले रहे हैं। क्या हो गया भूखे रहकर 'लोकपाल' आया ही नहीं। हमारी पहुंच विदेशों में भी है। साथ रहते तो काहे को लंदन हवाई अड्डे पर चैकिंग होती। यही काम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी किया था। हमारी मैडम को प्रधानमंत्री बन जाने दिया होता तो किसी की क्या मजाल थी कि अमेरिका में कोई उनकी चेकिंग करता।'
        'देश में कितनी भी महंगाई क्यों न हो, हम आपको ऐश कराते रहेंगे। जब लोग हमारे साथ आते हैं तो उनके विदेशों में तक खाते खुल जाते हैं। पिछले सालों में आपने देख ही लिया ही होगा कि हमने सरकार का कोई ऐसा मंत्रालय नहीं छोड़ा है जिसमें कोई घोटाला न हुआ हो।' इसलिए आपसे अपील है कि हमारी सरकार को एक बार फिर सत्ता में लाएं और मौज मनाएं। जय हिन्द!

चुनाव आए हैं


सारे नेता अपनी गली लौट आए हैं
सुना है कि फिर से चुनाव आए हैं

जो चलते थे अब तक गर्दनें ऊंची कर
झुके हुए 'सर' आज हमने उनके पाए हैं

राजनीति में हो जाते हैं सब भले चंगे
नेताओं ने भी अपने पुत्र आजमाएं हैं

देकर दर्द दूर हो गए थे जो पहले
हाथों में आज मरहम लेके आए हैं

सारे नेता अपनी गली लौट आए हैं...
सुना है कि फिर से चुनाव आए हैं...

सुमित 'सुजान', ग्वालियर

Monday, September 2, 2013

गिरते रुपए को संभाला जाए


गिरते रुपए को संभाला जाए
फिर कोई उपाय निकाला जाए

बहुत दिन काट लिए गरीबी में
किसी गली से चुनाव निकाला जाए

नेता, बाबा, रुपया और भ्रष्टाचारी
गिरावट का इनकी हिसाब निकाला जाए

सुमित 'सुजान'

Friday, August 9, 2013

शहादत


दुनिया से जाने वाले दिलों में रहेंगे।
सिर्फ मौत नहीं हम शहादत कहेंगे,
सुलगते हुए कहते हैं हमारे ये दिल,
हम भी बदला कभी न कभी लेकर रहेंगे।।


सुमित 'सुजान'

गद्दार



गद्दार तो मौके की फिराक में था।
'शरीफ' बन गया वो, जो नकाब में था,
वह था कांटों की तरह हमारी राह में
जो दुनिया की नजरों में गुलाब में था।।


सुमित 'सुजान'

Tuesday, July 30, 2013

आज का विचार


दोस्तों मैंने भी एक सर्वे किया है। मेरे सर्वे के मुताबिक चुनाव समय से पहले हो जाएं या बाद में लुटना जनता को ही है।
सुमित 'सुजान'

Sunday, July 28, 2013

चुटकी




दिग्गी ने दिल का हाल कह दिया।
कुछ ने इसे बुरी चाल कह दिया,
कोई तो जीते इस बार चुनाव में,
इसलिए उन्हें 'टंच माल' कह दिया।।

सुमित 'सुजान'

Thursday, July 25, 2013

आज का विचार




सरकार ने दावा किया है कि देश में गरीबों की संख्या घट गई है। मैं इस बात को बिल्कुल सही मानता हूं। क्योंकि जीतने भी गरीब थे उनमें से अधिकतर लोग अब 'नेता' बन गए हैं।

                             सुमित 'सुजान'

Wednesday, April 17, 2013

आप भी समझिए कुत्ते के फायदे


  • व्यंग्य/झुनझना

        वैज्ञानिकों ने एक नया शोध किया है। शोध बड़ा शानदार है। यह शोध कई मामलों में हमारी मदद कर सकता है। राजनैतिक, पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षणिक हर मामलों में हम इस शोध की मदद ले सकते हैं। वैज्ञानिकों ने शोध किया है कि कुत्ते आदमी के नजरिये को अच्छी तरह से समझ जाते हैं। कुत्ते आदमी के दिल की बात आसानी से समझ सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ के मनोविज्ञान विभाग की डॉक्टर जुलियाने कामिन्स्की ने इस मामले में अध्ययन किया है। खैर अपन को अध्ययन से क्या करना, अपन को तो कुत्ते की समझदारी को समझना चाहिए। हमें यह भी समझना चाहिए कि हम कुत्तों से कैसे मदद ले सकते हैं। भले ही आज आदमी वफादार न रहा हो लेकिन कुत्ते तो आज भी वफादार होते हैं। यह भी हम जानते हैं कि कुत्तों को शुरू से ही समझदार जानवार माना जाता है। लेकिन हम भारतीय अपने आपको ही सबसे ज्यादा समझदार मानते हैं। खैर मैं तो कुत्तों के उपयोग  की बात कर रहा था। मैं समझता हूं कि कुत्ते की समझदारी का उपयोग हम राजनीतिक मामलों में अधिक कर सकते हैं। उदाहरण के लिए हम प्रधानमंत्री की झगड़े को ही ले लें। अगर हर राजनीतिक पार्टियां एक-एक कुत्ता पाल लें तो काफी हद समस्या का समाधान हो सकता है। राजनीतिक पार्टियां उन्हें ही अपना सहयोगी बनाए जिनके लिए कुत्ते हां करें। कुत्ते पार्टियों के नेताओं की मन की बात समझ कर यह बता सकते हैं कि कौन सा राजनेता प्रधानमंत्री पद के लिए विवाद खड़ेगा, कौन सा नहीं। हम पार्टी में ऐसे ही कार्यकर्ताओं को कुत्तों द्वारा चयन कराएंगे जो हमारी हां में हां मिलाएं। पारिवारिक मामले में भी हम कुत्तों की मदद ले सकते हैं। कुत्ते हमें समझकर यह बता सकते हैं कि हमारे लिए कौन सा काम करना ठीक रहेगा। कई विवाद आसानी से सुलझाए जा सकते हैं। कोई बाबू अगर हमारा काम अटका रहा है तो हम कुत्ते का उपयोग करके उसकी मन की बात जानकर कुछ ले-देकर अपना काम निपटा सकते हैं। ऐसे एक नहीं कई काम हैं जिनमें हम कुत्तों की मदद लेकर अपना काम निपटा सकते हैं। मुझे तो कुत्तों की अहमियत समझ आ गई है, इसलिए मेरा मन भी एक कुत्ता पालने की सोच रहा है। अगर आप लोग भी पाल लें तो अच्छा ही होगा।

Thursday, April 11, 2013

मधुमक्खियों का निंदा प्रस्ताव


  • व्यंग्य/झुनझना
मैं अभी मधुमक्खियों का आक्रोश देखकर आ रहा हूं। बहुत नाराज हो रही थीं। जबसे युवराज राहुल गांधी ने देश को मधुमक्खी का छत्ता कहा तब से उनकी नींद उड़ी हुई है। अभी थोड़ी देर पहले ही मधुमक्खियों ने एक अधिवेशन किया जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया। अधिवेशन में जैसे ही एक मधुमक्खी को बोलने का जैसे ही मौका दिया गया तो उसने कहा कि 'देश के राजनेताओं ने हर मामले में सूंघना कर दिया है। अब उन्होंने हमारे छत्ते पर भी राजनीति कर दी है। उसने रानी मधुमक्खी की ओर चिंता भरे अंदाज में कहा कि मुझे तो लगता है कि बड़े-बड़े घोटालों को करने के बाद अब राजनेता हमारे छत्ते से भी कोई न कोई घोटाला न कर दें। इसके बाद दूसरी मधुमक्खी की जब बारी आई तो उसके तीखे तेवर बिल्कुल तीर की तरह चल रहे थे। उसने अपने भाषण में कहा कि भारत जैसे देश को मधुमक्खी के छत्ते की तरह बताकर कहीं इसे भी लूटने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा। वैसे तो हमें लगता है कि सत्ता को छत्ता कहा जाना चाहिए। क्योंकि सत्ता में आते ही नेता सत्ता से चिपक जाते हैं। सत्ता छोडऩे का उनका मन ही नहीं करता है। हम मधुमक्खियां तो दूसरों के लिए मीठा-मीठा शहद बनाते हैं लेकिन ये नेता सत्ता के छत्ते में चिपककर शहद तो बनाते ही हैं और खुद ही हजम कर जाते हैं। और बदले में नफरत का रस समाज में घोल देते हैं। अब एक और मधुमक्खी बोली। ये राजनेता तो हमारे पुरखों तक पहुंच गए हैं। कल ही एक नेता कह रहा था कि मधुमक्खी देवी का अवतार हैं। पुराणों के मुताबिक मधुमक्खी को भ्रामरी देवी माना जाता है और उत्तराखंड में उनका मंदिर है। हमारे पुरखों को वैसे तो कभी पूछा नहीं अब सत्ता का लालची रस मन में घुल रहा है तो हमारे पुरखे तक ध्यान आ रहे हैं। इसलिए हम सभी एक मिल जुलकर इनकी बातों का प्रतिकार करना चाहिए। हमें चुप नहीं बैठना चाहिए। सभा के अंत में यह तय किया गया कि सभी मधुमक्खियां इस मामले को लेकर जल्द एक आंदोलन करेंगी और नेताओं से फिर कभी उनके मामले में दखलंदाजी नहीं करने की अपील करेंगी। इस रणनीति के बनते ही सारा माहौल भिन्न-भिन्न से गूंज गया मतलब की सभी ने इस प्रस्ताव को मान्य किया।