- चुनाव के समय नेताओं को सबसे ज्यादा याद डॉ. भीडराव अम्बेडकर जी की आती होगी। क्योंकि अम्बेडकर जी ने ही जनता को ऐसी ताकत दी जिसके कारण नेताओं को झुकना पड़ता है।
Thursday, November 7, 2013
चुटकी
Monday, October 7, 2013
सरकार
चुनाव आ गए हैं। जिधर देखो उधर नेता अपना 'नेतापन' दिखा रहे हैं। जब कोई
व्यक्ति बहुत-बहुत अच्छी बात करता है तो उसे अपनापन कहते हैं। बिल्कुल इसी
तरह जब कोई नेता अच्छी बातें करता है तो वह 'नेतापन' कहलाता है। आइए आपको
भी एक राजनीतिक सभा में ले चलते हैं। सभा चल रही है। नेता भाषण दे रहे हैं।
आप जिस तरफ खड़े हैं, वहां पर लगा लाउडस्पीकर सीधे आपके कानों तक
'नेतापने' की बातें आप तक पहुंचा रहा है। जिंदाबाद, जिंदाबाद के नारे तो
जैसे आफत लग रहे हैं। फिर भी क्या करें जब सभा में 'ट्रॉली' में भरकर लाए
गए हैं तो सुनना भी मजबूरी है।
खैर अपने मुखरचंद जी की सभाओं में तो जमकर भीड़ जुटती है। आज भी ऐसा ही
हुआ। भाषण देते हुए बोले- 'हम सत्ता में आ रहे हैं। पहले भी देश चलाया, आगे
भी चलाएंगे।'
बोले-'हमारे साथ रहोगे तो मजे करोगे मजे। हमने बहुत लोगों को मजे कराए हैं।
कलमाड़ी को ही देख लो। आज करोड़ों में खेल रहा है। ए.राजा, कनिमोझी, नवीन
जिंदल सभी ने सरकार में रहते खूब मजे किए। अब किस किस के नाम गिनाएं आपको।
नाम गिनाएंगे तो सुबह हो जाएगी।'
'हमारी पार्टी हमेशा से ही 'ए फ्रेंड इन नीड इज ए फ्रेंड इनडीड' पर विश्वास
करती है। आप मुलायम सिंह को देख लो। परमाणु समझौते के वक्त उन्होंने
हमारी सरकार बचाई, हमने उन्हें जांच एजेंसी से बचाया। 'माया' मैडम का भी
कुछ ऐसा ही समझो। नहीं तो आज दोनों लालू यादव की तरह जेल में सजा काट रहे
होते। भैया हमारी सरकार में तो हर कोई मजे करता है।'
'कुछ लोगों को हमारी ताकत का अंदाजा नहीं रहता। जिन्हें अंदाजा रहता है वह
जानते हैं कि हम क्या-क्या करवा सकते हैं।' अण्णा हजारे और बाबा रामदेव यूं
ही पंगा ले रहे हैं। क्या हो गया भूखे रहकर 'लोकपाल' आया ही नहीं। हमारी
पहुंच विदेशों में भी है। साथ रहते तो काहे को लंदन हवाई अड्डे पर चैकिंग
होती। यही काम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी किया था।
हमारी मैडम को प्रधानमंत्री बन जाने दिया होता तो किसी की क्या मजाल थी कि
अमेरिका में कोई उनकी चेकिंग करता।'
'देश में कितनी भी महंगाई क्यों न हो, हम आपको ऐश कराते रहेंगे। जब लोग
हमारे साथ आते हैं तो उनके विदेशों में तक खाते खुल जाते हैं। पिछले सालों
में आपने देख ही लिया ही होगा कि हमने सरकार का कोई ऐसा मंत्रालय नहीं
छोड़ा है जिसमें कोई घोटाला न हुआ हो।'
इसलिए आपसे अपील है कि हमारी सरकार को एक बार फिर सत्ता में लाएं और मौज
मनाएं।
जय हिन्द!
चुनाव आए हैं
सारे नेता अपनी गली लौट आए हैं
सुना है कि फिर से चुनाव आए हैं
जो चलते थे अब तक गर्दनें ऊंची कर
झुके हुए 'सर' आज हमने उनके पाए हैं
राजनीति में हो जाते हैं सब भले चंगे
नेताओं ने भी अपने पुत्र आजमाएं हैं
देकर दर्द दूर हो गए थे जो पहले
हाथों में आज मरहम लेके आए हैं
सारे नेता अपनी गली लौट आए हैं...
सुना है कि फिर से चुनाव आए हैं...
सुमित 'सुजान', ग्वालियर
Monday, September 2, 2013
Tuesday, July 30, 2013
Sunday, July 28, 2013
Thursday, July 25, 2013
Wednesday, April 17, 2013
आप भी समझिए कुत्ते के फायदे
- व्यंग्य/झुनझना
वैज्ञानिकों ने एक नया शोध किया है। शोध बड़ा शानदार है। यह शोध कई मामलों में हमारी मदद कर सकता है। राजनैतिक, पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षणिक हर मामलों में हम इस शोध की मदद ले सकते हैं। वैज्ञानिकों ने शोध किया है कि कुत्ते आदमी के नजरिये को अच्छी तरह से समझ जाते हैं। कुत्ते आदमी के दिल की बात आसानी से समझ सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ के मनोविज्ञान विभाग की डॉक्टर जुलियाने कामिन्स्की ने इस मामले में अध्ययन किया है। खैर अपन को अध्ययन से क्या करना, अपन को तो कुत्ते की समझदारी को समझना चाहिए। हमें यह भी समझना चाहिए कि हम कुत्तों से कैसे मदद ले सकते हैं। भले ही आज आदमी वफादार न रहा हो लेकिन कुत्ते तो आज भी वफादार होते हैं। यह भी हम जानते हैं कि कुत्तों को शुरू से ही समझदार जानवार माना जाता है। लेकिन हम भारतीय अपने आपको ही सबसे ज्यादा समझदार मानते हैं। खैर मैं तो कुत्तों के उपयोग की बात कर रहा था। मैं समझता हूं कि कुत्ते की समझदारी का उपयोग हम राजनीतिक मामलों में अधिक कर सकते हैं। उदाहरण के लिए हम प्रधानमंत्री की झगड़े को ही ले लें। अगर हर राजनीतिक पार्टियां एक-एक कुत्ता पाल लें तो काफी हद समस्या का समाधान हो सकता है। राजनीतिक पार्टियां उन्हें ही अपना सहयोगी बनाए जिनके लिए कुत्ते हां करें। कुत्ते पार्टियों के नेताओं की मन की बात समझ कर यह बता सकते हैं कि कौन सा राजनेता प्रधानमंत्री पद के लिए विवाद खड़ेगा, कौन सा नहीं। हम पार्टी में ऐसे ही कार्यकर्ताओं को कुत्तों द्वारा चयन कराएंगे जो हमारी हां में हां मिलाएं। पारिवारिक मामले में भी हम कुत्तों की मदद ले सकते हैं। कुत्ते हमें समझकर यह बता सकते हैं कि हमारे लिए कौन सा काम करना ठीक रहेगा। कई विवाद आसानी से सुलझाए जा सकते हैं। कोई बाबू अगर हमारा काम अटका रहा है तो हम कुत्ते का उपयोग करके उसकी मन की बात जानकर कुछ ले-देकर अपना काम निपटा सकते हैं। ऐसे एक नहीं कई काम हैं जिनमें हम कुत्तों की मदद लेकर अपना काम निपटा सकते हैं। मुझे तो कुत्तों की अहमियत समझ आ गई है, इसलिए मेरा मन भी एक कुत्ता पालने की सोच रहा है। अगर आप लोग भी पाल लें तो अच्छा ही होगा।
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