Saturday, June 24, 2017

चुटकी

 चुटकी
नया यूपी देख जनता सारी दंग हो गई,
मजनुओं की चाल भी अब ढंग हो गई।
वादा कर ऐसा निभाया  योगी जी ने,
बेचारे टुंडा की दुकान भी बंद हो गई।।
सुमित राठौर

Friday, March 25, 2016

चुटकी

ख़त्म हुई सत्ता की नूराकुश्ती जम्मू में,
भाजपा बैठेगी अब मेहबूबा के तम्बू में।

Monday, March 21, 2016

चुटकी

बड़ी मुश्किल से बेचारा जेल से छूटा है,
इसलिए प्रधानमंत्री मोदी जी से रूठा है,
कमी बाकि है कन्हैया की देशभक्ति में
लगता है वकीलों ने कुछ कम कूटा है।।
सुमित राठौर

Friday, January 22, 2016

चुटकी


रोहित तुम जबसे फाँसी पर झूल गए,
कुछ घड़यालियों के सीने फूल गए।
दलित कहकर वोटबैंक नापा जाता है,
नेता हमारे मानवता भी भूल गए।।
सुमित राठौर

Thursday, January 21, 2016

गजल

गजल
उन्हें अपनी खूबसूरती पर ग़ुमान है,
क्योंकि मेरा दिल उन पर मेहरबान है।

कुछ लोगों के इशारे पर जला दी बस्ती
तेरे शहर का शख्स कितना नादान है।

अच्छा भला था जब रहता था मेरे साथ,
जब से नेता बना है तब से बेईमान है।

परिंदों की तरह हैं मेरे भी सपने,
मेरे सर भी तो आसमान है।

सुमित राठौर

Thursday, October 8, 2015

चुटकी


गोमांस पर बयान एक के बाद एक सधे हो गए,
वोट बैंक के लालच में नेता हमारे गधे हो गए।
सुमित राठौर

चुटकी

हमारे देश में भी अजीब-अजीब लतीफे हो रहे हैं,
कुत्ता हो रहा बरी, चोरी सांसदों के पपीते हो रहे हैं।।
सुमित राठौर

Saturday, September 26, 2015

केवल एक बार ही मिले आरक्षण का लाभ

देश एक बार फिर आरक्षण की आग में झुलसता दिखाई दे रहा है। एक  ओर जहां कुछ समुदाय आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं तो दूसरी ओर आरक्षण पर नए सिरे से विचार किए जाने की चर्चाएं चल रही हैं। इन्हीं चर्चाओं के बीच क्या इस बात पर विचार किया जा सकता है कि आरक्षण का लाभ अभ्यार्थी को केवल एक बार ही मिले। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं, पढ़ाई के समय अथवा नौकरी जैसे किसी एक विकल्प को चुनना होगा। अगर सरकार ऐसी व्यवस्था करती है तो किसी न किसी स्थान पर सभी वर्ग एक साथ दिखाई देंगे। यही समय की मांग है।
26 सितम्बर 2015 को स्वदेश में प्रकाशित जनमानस।

Monday, May 18, 2015

सबूत


  • सुमित राठौर
         बीस साल पुराने एक मामले की सुनवाई करने बैठे एक जज साब काफी गुस्से में दिखाई दे रहे थे। एक चापलूस वकील ने पता कर लिया था कि जज साब आज ही मामले को निपटाने वाले हैं। मामला एक सड़क दुर्घटना का था।ब बिल्कुल सलमान खान जैसा। आपराधिक मामले भी कितने अजीब होते हैं। गवाह बदल जाते हैं, वकील बदले जाते हैं, थानेदार बदल जाते हैं और तो और जज साब भी बदल जाते हैं। लेकिन कुछ नहीं बदलता है, तो वह होता है घटना स्थल। मजे बात देखिए कि जिस फुटपाथ पर यह हादसा हुआ था, वहां आज आलीशान इमारतें खड़ी हो गई हैं। लेकिन पुलिस की फाइलों में वहां आज भी फुटपाथ ही है।
          खैर अपन तो मामले पर आते हैं। आरोपी कटघरे में है। जज साब पूरे ध्यान से आरोपी पक्ष के वकील की दलीलें सुन रहे हैं। दूसरा पक्ष कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। क्योंकि उनके पास सबूतों का अभाव है। जज साब फैसला सुनाने ही वाले थे कि एक 20 साल का युवक कटघरे में आकर खड़ा हो गया, और न्याय की गुहार करने लगा। जज साहब ने सवाल किया कि तुम कौन? तो युवक ने बताया कि मैं इस मामले का एक मात्र सबूत हूं। युवक ने कहा-’जज साब! मेरा नाम आलोक है। 20 साल पहले जो व्यक्ति इन साहब की गाड़ी के नीचे आकर मरा था, वह मैं ही था। युवक की बात पर सुनवाई कक्ष में सन्नाटा पसर गया।
                इस बीच सन्नाटे को चीरते हुए आरोपी के वकील का एक सवाल आया। सवाल था कि तुम कैसे सबूत हो सकते हो? यह मामला तो 20 साल पुराना है। तुम्हारी उम्र ही 20 साल है। आलोक ने बताया कि जज साब मेरा पुनर्जन्म हुआ है। फैसले में देरी हो रही थी, इसलिए मैंंने सोचा कि मैं खुद सबूत बनकर मामले को निपटाने में आपका साथ दूं। मुझे सब याद आ गया है। सामने वाले साहब ने ही शराब के नशे में मुझ पर गाड़ी चढ़ा दी थी। आलोक ने कहा कि जज साब जिस प्रकार ‘करण अर्जुन‘ जैसी पुनर्जन्म वाली फिल्में हिट हो सकती हैं, जिस प्रकार भगवान विष्णु ने राम का अवतार लेकर दुष्ट रावण का सत्यानाश किया था, ठीक उसी प्रकार मेरा भी पुनर्जन्म हुआ है। आलोक के तर्क जज साहब को समझ आ रहे थे। क्योंकि वह घटना के बारे में पूरी हकीकत बयां कर रहा था। लेकिन जब फैसला सुनाया तो आरोपी को रिहा कर दिया गया। सबूत के अभाव में ऐसा फैसला दिया गया।
         फैसले के बाद जज साब ने आलाेक के सिर पर प्यार भरा हाथ फेरते हुए कहा-’बेटा मुझे तुम्हारी एक-एक बात सही लग रही थीं। लेकिन तुम तो जानते हो कि हमारे हाथ कानून से बंधे हैं। मैंने कानून की किताबें तोते से भी अच्छी तरह रटी हैं। मुझे कहीं भी पुनर्जन्म सबूत के रूप में दिखाई नहीं दिया। कानून में पुनर्जन्म सबूत होता तो तुम्हारी सही दलीलों को हम भी सही मान लेते...।’